प्रभु यीशु के जन्म की कहानी
आप सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं. आज ही के शुभ दिन जीसस क्राइस्ट ने इस धरती पर जन्म लिया था. आइये, आज हम उनके जन्म की पूरी कहानी जानते हैं.
लगभग 2000 साल पहले जब यहूदिया (Judea), जो अब इजराइल का हिस्सा है; में राजा हेरोदेस (King Herod) का शासन था, तब परमेश्वर ने गेब्रियल (Gabriel) नाम के एक फ़रिश्ते को नासरत (Nazareth) में रहने वाली एक युवा महिला के पास भेजा. उसका नाम मरियम (Mary) था और उसकी शादी युसुफ (Joseph) नाम के एक नवयुवक से होने वाली थी.
गेब्रियल ने मरियम से कहा, “ पीस बी विथ यू! परमेश्वर तुमसे खुश हैं और उन्होंने तुम्हे आशीर्वाद दिया है!”
मरियम फ़रिश्ते को देखकर आश्चर्यचकित थी, और सोच रही थी की फ़रिश्ते की बात का क्या मतलब है.
फ़रिश्ते ने कहा,
डरो मत , ईश्वर की तुम पर बड़ी कृपा है. तुम एक पवित्र आत्मा के माध्यम से गर्भवती होगी और एक बालक को जन्म दोगी और उसे तुम यीशु (Jesus) कह कर पुकारोगी. वो परमेश्वर का अपना पुत्र होगा और उसका राज्य कभी ख़त्म नहीं होगा.
मरियम डरी हुई थी लेकिन उसको ईश्वर पर भरोसा था.
वही हो जो भगवान ने चाहा है.
मरियम ने फ़रिश्ते को जवाब दिया.
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गेब्रियल ने मरियम से ये भी बताया कि उसकी कज़न एलिज़ाबेथ, जिसे सब लोग मानते थे कि अब वो माँ नहीं बन सकती, को भी एक पुत्र होगा जिसे ईश्वर ने यीशु का मार्ग तैयार करने के लिए चुना है.
इसके बाद मरियम ने अपने परिवार को अलविदा कहा और अपनी कज़न एलिज़ाबेथ और उसके पति जकर्याह (Zechariah) से मिलने गयी. एलिज़ाबेथ मरियम को देख कर बहुत खुश हो गयी. उसे पहले से पता था कि मरियम को ईश्वर के पुत्र की माँ बनने के लिए चुना गया है.
दरअसल, एक फ़रिश्ते ने पहले ही जकर्याह को बता दिया था कि भविष्य में एलिज़ाबेथ का पुत्र ही लोगों को यीशु के स्वागत के लिए तैयार करेगा और उसका नाम जॉन होगा. मरियम अगले तीन महीनो तक एलिज़ाबेथ के साथ रही और फिर वापस नासरत चली गयी.
जब युसुफ को पता चला कि उसकी होने वाले बीवी पहले से ही गर्भवती है तो उसे चिंता होने लगी. वह सोचने लगा कि क्या उसे इस शादी के लिए मना कर देना चाहिए. पर जल्द ही उसे भी एक फ़रिश्ते ने सपने में आकर यीशु के जन्म की बात बता दी और उसे शादी से ना डरने की सलाह दी. इसके बाद युसुफ ने मरियम से शादी कर ली.
उस समय, मरियम और युसुफ जहाँ रहते थे वो रोमन एम्पायर का हिस्सा था और ऑगस्टस (Augustus) उनका राजा था. राजा चाहता था कि उसके राज्य में जितने भी लोग हैं उनके नाम की एक लिस्ट तैयार की जाए ताकि हर किसी से टैक्स वसूला जा सके.
उसने आदेश दिया कि हर किसी को उस जगह पर लौटना होगा जहाँ का वह मूल निवासी है और अपना एक रजिस्टर में दर्ज कराना होगा.
इसके बाद मरियम और युसुफ नासरत से 70 मील की यात्रा करके बेतलेहेम (Bethlehem) पहुंचे, क्योंकि युसुफ वहीँ का मूल निवासी था.
यह यात्रा वैसे ही कठिन थी पर मरियम के गर्भवती होने के कारण यह और भी मुश्किल हो गयी थी.
जब वे बेतलेहेम पहुंचे तो नाम रजिस्टर करवाने के लिए वहां पहले से ही इतनी भीड़ थी कि उन्हें वहां रहने की कोई सही जगह ही नहीं मिली.
ठहरने की एकमात्र जगह जो से ढूंढ पाए वो थी जानवरों के बीच.
💡 उस समय लोग खुद को गर्म रखने के लिए अक्सर घर के अन्दर जानवरों को रखा करते थे, खासतौर पर रात के समय. और यही वो पवित्र जगह थी जहाँ मरियम ने प्रभु यीशु को जन्म दिया.
बेतलेहेम के बाहर मौजूद गड़ेरिये जब रात भर अपनी भेड़ों की देखभाल कर रहे थे. जब सुबह हुई तब उनके साथ भी एक आश्चर्यजनक घटना हुई. अ
गली सुबह एक फ़रिश्ता उनके सामने आया. गड़ेरिये पहले तो उसे देखकर काफी डर गए पर फ़रिश्ते ने उनसे कहा,
डरो मत. मेरे पास तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है. आज बेतलेहेम में तुम्हारे लिए एक रखवाले ने जन्म लिया है और वो तुम्हे जानवरों की चारा खिलाने वाली एक नाँद में मिलेगा.
इसके बाद कई और फ़रिश्ते प्रकट हुए और आकाश में प्रकाश फ़ैल गया. और वे ईश्वर की प्रशंसा में गाने लगे.
फरिश्तों के जाने के बाद गड़ेरियों ने आपस में कहा, “चलो, बेतलेहेम चलते हैं और वहां जाकर देखते हैं कि क्या हुआ है.”
सभी गड़ेरिये बेतलेहेम पहुंचे और वहां उन्होंने यीशु को एक नाँद में लेटे हुए देखा, जैसा कि फ़रिश्ते ने बताया था. धीरे-धीरे यह बात फैलने लगी… सभी आश्चर्यचकित थे.
जब यीशु पैदा हुए तो आकाश में एक नया सितारा दिखाई दिया, जिसे देखकर दूर-दराज देशों में रहने वाले ज्ञानी व्यक्ति भी समझ गए कि किसी महान राजा का जन्म हुआ है. और वे उपहारों के साथ नए राजा की खोज में निकल गए. और अंततः उन्हें बेतलेहेम में ढूंढ निकाला और अपने साथ लाये कीमती उपहार भेंट किये.

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